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100% ऑनलाइन पंजीकरण
100+ विशेषज्ञ जूरी पैनल
₹ 15.6 लाख + कुल पुरस्कार राशि
सम्पूर्ण भारत सभी परंपराएँ
4 प्रमुख श्रेणियाँ

गांधर्व मंच

भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं संत रचित अभंग गायन के लिए एक राष्ट्रीय मंच

गांधर्व मंच भारतीय शास्त्रीय संगीत को समर्पित एक राष्ट्रीय स्तर का मंच है — जो परंपरा, अनुशासन और साधना पर आधारित है। यह कलाकारों को एक गरिमापूर्ण एवं सुव्यवस्थित वातावरण प्रदान करता है, जहाँ वे अपनी कला को प्रामाणिकता और सौंदर्य के साथ प्रस्तुत कर सकें। यह मंच केवल प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि साधना, निरंतर अभ्यास (अभ्यास) और हमारी समृद्ध सांगीतिक विरासत के संरक्षण को भी उतना ही महत्व देता है।

गुरु–शिष्य परंपरा की विरासत से प्रेरित यह पहल, शास्त्रीय संगीत की शुद्धता और संत परंपरा की भक्ति-भावना को एक संतुलित एवं मार्गदर्शित स्वरूप में प्रस्तुत करती है। यह कोई 'प्रतिभा खोज' या लोकप्रियता की दौड़ नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच है जो साधना, सम्मान और सांस्कृतिक निरंतरता को समर्पित है।

01शास्त्रShastra

भारतीय शास्त्रीय संगीत का ज्ञान और उसके नियम — जैसे राग की संरचना, ताल और पारंपरिक सिद्धांत।

02साधनाSadhana

नियमित और समर्पित अभ्यास अपनी कला को निखारने के लिए दिया गया समय, प्रयास और अनुशासन।

03परम्पराParampara

गुरु से शिष्य तक संप्रेषित होने वाली परंपरा। प्रत्येक प्रतिभागी एक सांगीतिक वंश और विरासत का प्रतिनिधित्व करता है।

04भक्तिBhakti

संगीत में निहित भावना और समर्पण- यह केवल तकनीक नहीं, बल्कि अनुभूति और आत्मिक जुड़ाव का माध्यम है।

प्रतियोगिता पुरस्कार

भारतीय शास्त्रीय गायन

₹५०,००० तक के पुरस्कार

संत रचित अभंग गायन

₹५०,००० तक के पुरस्कार

तबला

₹५०,००० तक के पुरस्कार

पखावज

₹५०,००० तक के पुरस्कार

पुरस्कार वितरण (सभी श्रेणियों के लिए)

वयोगट प्रथम पुरस्कार द्वितीय पुरस्कार तृतीय पुरस्कार चतुर्थ पुरस्कार
९–१२ वर्ष, १३–१८ वर्ष ₹२५,००० ₹१५,००० ₹१०,००० ₹१०,०००
१९–२५ वर्ष, २६–४० वर्ष ₹५०,००० ₹३५,००० ₹२५,००० ₹२५,०००
पंजीकरण शुल्क (१५ मई तक)
९ से १८ वर्ष ₹ ५००
१९ से ४० वर्ष ₹ ७५०
विलंबित शुल्क
९ से १८ वर्ष ₹ ७००
१९ से ४० वर्ष ₹ ९५०
अभी पंजीकरण करें

पंजीकरण: प्रक्रिया १५ मई २०२६ तक या सभी सीटें भरने तक (जो पहले हो)। कृपया शीघ्र पंजीकरण कर अपनी सीट सुनिश्चित करें।

दो परंपराएँ. एक साझा दृष्टि।

भारतीय शास्त्रीय ज्ञान की गहराई और संत परंपरा की भक्ति को एक साथ लाते हुए, यह मंच भारत की समृद्ध सांगीतिक विरासत के एक सुंदर और सामंजस्यपूर्ण संगम को अभिव्यक्त करता है।

अखिल भारतीय गांधर्व महाविद्यालय मंडल

पं. विष्णु दिगंबर पलुस्कर की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, अखिल भारतीय गंधर्व महाविद्यालय मंडल ने दशकों से भारतीय शास्त्रीय संगीत शिक्षा में एक मार्गदर्शक शक्ति के रूप में कार्य किया है।

परंपरा और अनुशासन के प्रति गहरे सम्मान के साथ, मंडल ने एक सुव्यवस्थित शिक्षण प्रणाली के माध्यम से पीढ़ियों को संस्कारित किया है। साथ ही, यह संस्था भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध विरासत का संरक्षण निष्ठा और समर्पण के साथ करती आई है।

शास्त्रीय ज्ञान संरचित शिक्षण प्रणाली शैक्षणिक मार्गदर्शन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएँ

जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज संतपीठ, पि.चि.म.न.पा.

महाराष्ट्र की संत परंपरा, विशेष रूप से संत तुकाराम महाराज के उपदेशों में गहराई से निहित, संतपीठ संगीत को भक्ति, आत्मिक अभिव्यक्ति और सामूहिक सांस्कृतिक चेतना के रूप में प्रस्तुत करता है।

मूल्य-आधारित शिक्षा, सांस्कृतिक आधार और अनुशासित शिक्षण के साथ आध्यात्मिकता का समन्वय — यही संतपीठ का महाराष्ट्र की सांगीतिक परंपरा में महत्वपूर्ण और स्थायी योगदान है।

भक्ति परंपरा (Bhakti) वारकरी परंपरा सांस्कृतिक मूल्य संत रचित अभंग गायन

प्रतिभागिता की चार प्रमुख श्रेणियाँ

शास्त्रीय कला में आपकी यात्रा अनुशासन और साधना का मार्ग है, और हमारे विशेषज्ञ निर्णायक उसी साधना का सम्मान करते हैं। हम एक ऐसा मंच प्रदान करते हैं जहाँ केवल कला की उत्कृष्टता ही मानक है, जिससे प्रत्येक प्रतिभागी को उसकी वास्तविक प्रतिभा के आधार पर निष्पक्ष एवं विशेषज्ञ मूल्यांकन प्राप्त हो।

भारतीय शास्त्रीय गायन

Indian Classical Vocal

संत तुकाराम, संत ज्ञानेश्वर एवं अन्य संतों की भक्तिपूर्ण रचनाएँ — जिनका मूल्यांकन भाव, साहित्य की समझ और सांगीतिक प्रामाणिकता के आधार पर किया जाता है।

कनिष्ठ (९–१२ वर्ष) किशोर ( १३–१८ वर्ष) युवा ( १९–२५ वर्ष) वयस्क (२६–४० वर्ष)

संत रचित अभंग गायन

Sant Rachit Abhang Gayan

संत तुकाराम, संत ज्ञानेश्वर एवं अन्य संतों की भक्तिपूर्ण रचनाएँ — जिनका मूल्यांकन भाव, साहित्य की समझ और सांगीतिक प्रामाणिकता के आधार पर किया जाता है।

कनिष्ठ (९–१२ वर्ष) किशोर (१३–१८ वर्ष) युवा ( १९–२५ वर्ष) वयस्क (२६–४० वर्ष)

तबला

Tabla

तंत्री, वायु एवं ताल वाद्यों में शास्त्रीय प्रस्तुति — जिसका मूल्यांकन तकनीकी दक्षता, राग विस्तार और सांगीतिक संवेदनशीलता के आधार पर किया जाता है|

कनिष्ठ (९–१२ वर्ष) किशोर ( १३–१८ वर्ष) युवा ( १९–२५ वर्ष) वयस्क (२६–४० वर्ष)

पखवाज

Pakhawaj

केवल पारंपरिक पखावज बोल एवं रचनाएँ अनुमत हैं; फ्यूजन या प्रयोगात्मक शैली की अनुमति नहीं है. मूल्यांकन बोल की स्पष्टता, लयकारी, ताल अनुशासन एवं नियंत्रण के आधार पर किया जाता है.

कनिष्ठ (९–१२ वर्ष) किशोर ( १३–१८ वर्ष) युवा ( १९–२५ वर्ष) वयस्क (२६–४० वर्ष)

मंच तक पहुँचने के चार चरण

एक राष्ट्रीय मंच जहाँ समर्पण, अनुशासन और परंपरा का संगम होता है — हर साधक की साधना को विशेषज्ञ मूल्यांकन और शास्त्रीय प्रामाणिकता के साथ सम्मानित किया जाता है.

1

पंजीकरण

अपनी जानकारी भरें, श्रेणी एवं आयु वर्ग का चयन करें, और अपने गुरु एवं परंपरा का उल्लेख करें. पंजीकरण निर्धारित समय-सारणी के अनुसार बंद हो जाएगा.

2

प्रारंभिक चरण

आपकी प्रस्तुति का मूल्यांकन विशेषज्ञ जूरी द्वारा ऑनलाइन या क्षेत्रीय प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जो प्रत्येक श्रेणी के शास्त्रीय मानकों पर आधारित होगा.

3

अंतिम चरण

चयनित साधकों को संतपीठ, पिंपरी चिंचवड, पुणे में आयोजित अंतिम चरण में लाइव प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया जाएगा.

4

सम्मान

सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे, और उत्कृष्ट कलाकारों को संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जाएगा. जूरी का निर्णय अंतिम एवं बाध्यकारी होगा.

" जो सुनाई देता है वह ध्वनि है - जो भीतर अनुभव होता है वही संगीत है.

अपनी साधना को राष्ट्रीय मंच
पर प्रस्तुत करें

एक ऐसा मंच जहाँ शास्त्रीय अनुशासन, परंपरा और भक्ति का संगम होता है.

वोकल, वादन और अभंग गायन में भाग लें — जहाँ आपके गुरु, आपकी परंपरा और आपकी वर्षों की साधना का सच्चा सम्मान किया जाता है.

पंजीकरण प्रारंभ 2 अप्रैल २०२६
अंतिम चरण संतपीठ, पि.चि.म.न.पा. · ५ और ६ जून २०२६
पात्रता ऑल इंडिया · सभी घरानों का स्वागत
मूल्यांकन विशेषज्ञ जूरी · केवल योग्यता के आधार पर
▶ पंजीकरण करने का तरीका

अपनी यात्रा प्रारंभ करें

अपनी साधना को उस राष्ट्रीय मंच तक ले जाएँ जो परंपरा और वास्तविक योग्यता को महत्व देता है — लोकप्रियता को नहीं.

अभी पंजीकरण करें → सीमित प्रविष्टियाँ · चयन केवल योग्यता के आधार पर

गांधर्व मंच की जूरी

सम्मान और चयन पूर्णतः भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रतिष्ठित एवं अनुभवी विशेषज्ञों के पैनल द्वारा निर्धारित किया जाता है. जूरी पैनल के नाम मूल्यांकन चरण से पूर्व घोषित किए जाएंगे.

जूरी पैनल

भारतीय शास्त्रीय गायन

खयाल एवं ध्रुपद के वरिष्ठ साधक, जिन्हें राग शास्त्र का गहन ज्ञान एवं संस्थागत अनुभव प्राप्त है|

जूरी पैनल

तबला / पखवाज

प्रख्यात वादक एवं गुरु, जिनके पास व्यापक मंचीय अनुभव एवं शिक्षण (पैडागॉजिकल) विशेषज्ञता है|

जूरी पैनल

संत रचित अभंग गायन

देहू–आलंदी वारकरी परंपरा से जुड़े संत साहित्य एवं संगीत के मान्यताप्राप्त विद्वान|

जूरी अध्यक्ष

संस्थागत पर्यवेक्षण

अखिल भारतीय गांधर्व महाविद्यालय मंडल (ABGMVM) एवं संतपीठ के वरिष्ठ प्रतिनिधि, जो संपूर्ण मूल्यांकन प्रक्रिया की अध्यक्षता एवं निगरानी करते हैं|

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गांधर्व मंच २०२६ एक राष्ट्रीय स्तर की भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं संत-रचित अभंग गायन प्रतियोगिता है, जिसका आयोजन अखिल भारतीय गांधर्व महाविद्यालय मंडल, मुंबई तथा जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज संतपीठ, पी.सी.एम.सी. द्वारा किया जा रहा है।

यह मंच शास्त्रीय एवं भक्तिमय संगीत के साधकों को एक विश्वसनीय और योग्यता-आधारित मंच प्रदान करता है।
वेबसाइट पर दिए गए “पंजीकरण करें” बटन पर क्लिक करें, अपनी जानकारी भरें, श्रेणी चुनें, अपनी प्रस्तुति का वीडियो लिंक अपलोड करें और फॉर्म सबमिट करें।

पंजीकरण शुल्क का भुगतान करने के बाद ही आपका पंजीकरण पूर्ण माना जाएगा।
प्रथम चरण: ऑनलाइन वीडियो प्रस्तुति
अंतिम चरण: ऑफलाइन प्रस्तुति (केवल चयनित प्रतिभागियों के लिए)
समूह प्रस्तुति स्वीकार नहीं की जाएगी।
केवल एकल (Solo) प्रस्तुतियाँ ही मान्य हैं।
चयनित प्रतिभागियों को ऑफलाइन अंतिम चरण में प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया जाएगा।

अंतिम चरण का आयोजन यहाँ किया जाएगा:
जगद्गुरु संत तुकाराम महाराज संतपीठ स्कूल एवं जूनियर कॉलेज,
गेट नं. १६५३, पाटिल नगर, तळगांव चिखली,
पिंपरी-चिंचवड, पुणे, महाराष्ट्र – ४११०६२

ग्रैंड फिनाले: जून २०२६ (तारीख घोषित की जाएगी)।
सुर (Pitch), ताल (Rhythm), राग प्रस्तुति, आवाज़ की गुणवत्ता, भाव अभिव्यक्ति, रचनात्मकता, मंच प्रस्तुति, समग्र प्रभाव
नहीं, प्रतिभागियों को स्वयं निम्न व्यवस्था करनी होगी:
यात्रा
निवास
व्यक्तिगत खर्च
नहीं, शुल्क न तो वापस किया जाएगा और न ही स्थानांतरित किया जा सकता है।
केवल शास्त्रीय गायन (Classical Vocal) श्रेणी में पंजीकृत प्रतिभागी ही अभंग गायन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए अलग ईमेल आईडी से पुनः पंजीकरण करना होगा तथा अलग शुल्क का भुगतान करना आवश्यक है।ता/सकती है।
पंजीकरण की अंतिम तिथि १५ मई है, अथवा निर्धारित संख्या पूर्ण होने तक (जो पहले हो)
9–12 वर्ष आयु वर्ग के लिए केवल छोटा ख्याल प्रस्तुत करना आवश्यक है।

13–40 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभागियों को बड़ा ख्याल और छोटा ख्याल दोनों प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

दोनों प्रस्तुत करते समय क्रम इस प्रकार होना चाहिए:
राग की बंदिश → अस्थायी एवं अंतरा का आलाप → सरगम → बोल आलाप → तान आदि।
भारतीय शास्त्रीय गायन (एकल):
9–12 वर्ष: 6 मिनट (छोटा ख्याल)
13–40 वर्ष: 11 मिनट (बड़ा + छोटा ख्याल)

संत रचित अभंग गायन (एकल):
9–40 वर्ष: 6 मिनट

तबला (एकल):
9–12 वर्ष: 6 मिनट
13–40 वर्ष: 10 मिनट

पखावज (एकल):
9–12 वर्ष: 6 मिनट
13–40 वर्ष: 10 मिनट
नहीं। प्रतिभागी लाइव संगतकार या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (जैसे तबला मशीन, लेहरा, तानपुरा ऐप आदि) का उपयोग कर सकते हैं।
हाँ, अनुमति है।
हाँ, भाग ले सकते हैं।
हाँ, किया जा सकता है।
हाँ, अनुमति है।
दोनों मोड स्वीकार्य हैं।
हाँ। प्रतिभागी तबला मशीन या लाइव संगतकार दोनों का उपयोग कर सकते हैं।
नहीं। लाइव संगतकार या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण — दोनों विकल्प मान्य हैं।
नहीं। यह प्रतियोगिता केवल निम्नलिखित श्रेणियों तक सीमित है:
भारतीय शास्त्रीय गायन, संत रचित अभंग गायन, तबला, पखावज
अन्य किसी वाद्य को शामिल नहीं किया गया है।